आयुर्वेद के अनुसार तुलसी की पत्तियाँ सर्वरोगनाशक हैं। इनका प्रयोग विभिन्न रोगों में कई प्रकार से किया जाता हैं। लेकिन तुलसी के इस्तेमाल के पहले रोगी की आयु, शक्ति, रोग की प्रकृति और मौसम को ध्यान में रखना चाहिए।
तुलसी की प्रकृति गर्म होती हैं, इसलिए गर्मी के मौसम में कम मात्रा और सर्दी में कुछ ज्यादा मात्रा लेनी चाहिए। अधिकतर रोगों में सामान्य रूप से 7 से 11 पत्तियाँ लेना पर्याप्त होता हैं
तुलसी लेने की सामान्य विधि –
-आवश्यकताअनुसार 7 से 21 हरी तुलसी की पत्तियों को साफ करके चटनी जैसा बना ले और इसमें शहद में मिलाकर लें सकते हैं
– तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर भी लिया जा सकता है।
– यह खाली पेट ली जानी चाहिए उसके 1 घंटे बाद नाश्ता लें सकते हैं।
इसके साथ शाकाहारी प्राकृतिक भोजन करना चाहिए और तेज मिर्च मसालेदार, चटपटे और तले हुए आहार से बचना चाहिए। साथ ही योग और लम्बी श्वास की क्रियाओं का अभ्यास किया जाए तो अधिक और शीघ्र लाभ होता है।
उपरोक्त दी गई विधि से आवश्यकतानुसार दो -तीन महीने तक तुलसी का सेवन करने से सर्दी, जुकाम, साइनस, खांसी, पुराना से पुराना सिर दर्द, श्वास रोग, नेत्र रोग, पेप्टिक अल्सर, कब्ज, महिलाओं की अनेक बीमारियां, पुराना धीमा बुखार आदि कई रोग दूर होते है।
सावधानिया –
– यदि गर्म प्रकृति वालो को अधिक मात्रा में तुलसी के पत्तों के सेवन से शरीर के भीतर जलन या चेहरे आदि पर गर्मी के दाने निकल जाए तो ऐसी स्थति में पत्तियों की मात्रा काम कर दे या बंद कर दें।
– तुलसी की पत्तियाँ इस्तेमाल करने से पहले स्वच्छ पानी से साफ कर लेना चाहिए।
तुलसी का पौधा अमृत के सामान है इसलिए इसे हर घर में अवश्य रखना चाहिए।