पीलिया दूषित पानी b पदार्थो के सेवन से होता हैं, शरीर में पित्त की अधिकता के कारण भी होता हैं।
पीलिया के लक्षण –
पीलिया की पहचान कैसे करें और पीलिया के रोगी अपने भोजन में क्या ले, क्या ना ले –
1 ) पीलिया में हल्का बुखार 99 से 100 तक बना रहता हैं।
2) इस रोग में रोगी की आँखे, त्वचा, नाख़ून और मुँह आदि हल्दी की तरह पीले हो जाते हैं।
3) मूत्र पीले रंग का आता हैं।b
4) शरीर में कमजोरी महसूस होती हैं, खाने में अरुचि होने लगती हैं।
5) मुँह सुखना, मिचली, पेट फूलना, गैस बनना, कई बार खुजली होना भी पीलिया की निशानी हैं।
6) पीलिया के रोगी को चक्कर आना, सिर में दर्द, नींद की कमी जैसे भी लक्षण भी दिखाई देते हैं।
यदि इन सभी लक्षणों में से कोई भी लक्षण किसी भी व्यक्ति में दिखाई देते हैं तब डॉक्टर से जाँच अवश्य करवाए।
पीलिया में क्या ना खाए –
1) पीलिया के रोगी को घी, तेल, हल्दी, लाल मिर्च, गर्म मसालों से बनी चीजे, अचार, खट्टे पदार्थ नहीं खाना चाहिए।
2) पीलिया के रोगी को धूप में घूमना, आग के पास बैठना, परिश्रम के काम करना, अधिक पैदल चलना और क्रोध, तनाव से बचना चाहिए।
3) अशुद्ध पानी, अशुद्ध व बासी खाद्य पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए।
पीलिया के रोगी भोजन में क्या ले सकते हैं –
1) सब्जियों में परवल, चौलाई, कच्ची मूली, घीया, तोरई, टिन्डे, आंवला, टमाटर, लहसुन आदि लिया जा सकता हैं।
2) मौसमी फल जैसे पपीता, चीकू, खजूर आदि फल भी ले सकते हैं।
3) पीलिया के रोगी के लिए कच्चा नारियल, जौ का पानी, मीठा अनार का रस, फटे दूध का पानी, काली मिर्च व थोड़ा नमक मिलाकर पतली छाछ पीना हितकारी हैं।
4) रोगी को अच्छे से साफ गन्ने का स्वच्छता से बनाया हुआ रस दिया जा सकता हैं।
5) मूंग दाल पानी या बिना मसाले की मूंग की दाल में काला नमक व काली मिर्च मिलाकर भी लिया जा सकता हैं।
6 ) मुनक्का या किशमिश के 20 से 25 दानो को रात भर पानी में भिगोकर सुबह वही मुनक्का खाकर ऊपर से वही पानी पी लेना चाहिए।
पाठको से निवेदन हैं की उपरोक्त जानकारी का प्रयोग वे किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श के बाद ही करें।